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Saturday, December 14, 2013

18 Conditions of AAP

18 Conditions of AAP: पास करोगे तो ही परीक्षा दूँगा


बच्चों के खेल में जिसके पास बैट या बॉल होती है वह खेल को शुरू करवाने के लिए अपनी शर्तें रखता है। पहले मुझे बैटिंग दोगे तो खेलूँगा। या मुझे बॉल धीमी फेंकोगे तो खेलूँगा। तेज बॉलिंग करोगे तो नहीं खेलूँगा। मुझे हाफ़ सेंचुरी से पहले आऊट करोगे तो अपना बैट वापिस ले लूँगा। आदि आदि।
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में आजकल कुछ ऐसा ही देखने में आ रहा है। विधानसभा में किसी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं आया। भाजपा के पास 32, AAP के पास 28 और काँग्रेस के पास 8 विधायक हैं। उपराज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमन्त्रित किया तो उसने अपनी असमर्थता जाहिर कर दी। इसके बाद एक राजनीतिक प्रहसन शुरू हो गया जिसे दिल्ली की जनता और प्रतिनिधि संभवतः पहली बार देख रहे हैं।
काँग्रेस ने बिना शर्त AAP को समर्थन की घोषणा कर दी। जवाब में AAP ने 18 शर्तों की फेहरिस्त जारी करके कहा कि यदि काँग्रेस और भाजपा इन 18 शर्तों को मानेंगे तो हम सरकार बनाएँगे वरना तो नहीं बनाएँगे। अभी तक राजनीति को गम्भीर कार्यों का स्थान समझा जाता है। कुछ लोगों को कहना है कि AAP की राजनीतिक विजय के पश्चात राजनीति में अगम्भीरता बढ़ी है। लोग कुछ भी अव्यवहारिक कह देने को सामान्य मानने लगे हैं।
राजनीति के विचारक पूछते हैं कि इन 18 शर्तों से बड़ा राजनैतिक मज़ाक और क्या हो सकता है। ये 18 शर्तें वे वायदे हैं जिन्हें AAP ने दिल्ली के जनता से किया था। इन 18 शर्तों को अगर वे अपने विरोधियों से पूरा करवाना चाहते हैं तो फिर वे स्वयँ क्या करेंगे। चुनावों में उनका वायदा था कि वे खुद इन 18 शर्तों को पूरा करेंगे। लेकिन अब वे इन्हें अपने राजनीतिक विरोधियों के द्वारा पूरा करवाना चाहते हैं।
AAP का कहना है कि हमें इन 18 शर्तों को पूरा करके दोगे तो ही हम सरकार बनाएँगे। टीवी के कार्यक्रमों में आए एक विद्वान ने कहा कि ये नौसिखिये लोग हैं जो सरकार बनाने के लिए बालकों के खेल जैसी शर्तें रख रहें हैं। जनता के बीच काम करने से पहले ही ये अपने विरोधियों से इनके खिलाफ़ राजनीति ना करने का आश्वासन चाहते हैं। यह एक भयभीत दल का काम है। समरवीर यौद्धा इस तरह की पलायनवादी बातें नहीं करते कि परीक्षा में तभी बैठेंगे जब पास कराने का भरोसा दोगे।
पूछा जा रहा है कि यह राजनीति है या राजनीति के नाम पर वितंडा है।
 
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